1965 में सियोल में जन्मे शिन डोंग-इल को तीसरी कक्षा में पहली बार पता चला कि संगीत भी कोई रचता है। तब उन्होंने सोचा कि वे भी संगीत बनाएँगे। कॉलेज के दिनों में उन्होंने हर दिन संगीत-नोटबुक का एक पन्ना आसान धुनों से भरकर संगीत के ज़रिए डायरी लिखने की कोशिश की। इसी कोशिश से वे पियानो के छोटे टुकड़े लगातार लिखने लगे, और यह सिलसिला देश लौटने के बाद जारी हुए ‘नीली साइकिल’ तक पहुँचा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
बताया जाता है कि शिन डोंग-इल के घर में शास्त्रीय संगीत हमेशा बजता रहता था। उनके पिता कोरियाई भाषा के शिक्षक थे और उनकी माँ कला की शिक्षिका थीं।
उनकी पहली रचना एक सिम्फनी लिखने की कोशिश थी। करीब दस साल की उम्र में खिलौनों से प्रेरित होकर उन्होंने एक बड़ी रचना की कल्पना की, लेकिन वह सफल नहीं हुई। छठी कक्षा में उन्होंने पियानो के लिए एक मिनुएट लिखा। बताया जाता है कि उसकी नोटेशन खो गई, लेकिन धुन उनके मन में बनी रही।
शिन डोंग-इल ने 1984 में सियोल राष्ट्रीय विश्वविद्यालय (서울대학교) के संगीत-रचना विभाग में दाखिला लिया। लेख में बताया गया है कि संगीत-रचना विभाग की प्रवेश परीक्षा में दृष्टि-पठन (नोटेशन देखकर गाने की परीक्षा), श्रवण-परीक्षा (सुनी हुई धुन को नोटेशन में लिखने की परीक्षा), पियानो का व्यावहारिक परीक्षण और हार्मनी जैसे विषय शामिल होते हैं। बताया जाता है कि उन्होंने स्वर-नाम पूरी तरह याद कर लिए थे और नोटेशन देखे बिना भी उन्हें गुनगुना सकते थे। यह अनुभव संगीत सुनकर उसकी संरचना और प्रवाह समझने का आधार बना हो सकता है।
1989 में वे अमेरिका गए और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय (뉴욕대학교) के स्नातकोत्तर कार्यक्रम में पढ़ाई की। उन्होंने वायलिन और सेलो के लिए एक युगल रचना ‘स्ट्रिंग्स’ नामक वाद्य-तंत्री संगीत की विशेषज्ञ पत्रिका की प्रतियोगिता में भेजी। वह चुनी गई और उन्हें पत्रिका में प्रकाशन के लिए 150 डॉलर मिले। लेख में इसे संगीत रचकर अर्जित उनकी पहली आय बताया गया है और कहा गया है कि इसी से वे संगीतकार के रूप में पहली बार ‘पेशेवर’ बने।
अमेरिका में उन्होंने शिला राजवंश के ह्यांग्गा पर आधारित एक रचना और एकल वायलिन के लिए बिना संगत का एकल-वादन भी जारी किया। लेख के अनुसार, ह्यांग्गा पर आधारित तीन गीत सेलो की संगत के साथ सोप्रानो आवाज़ में अंग्रेज़ी में प्रस्तुत किए गए थे, जबकि वायलिन का एकल-वादन सान्जो को ध्यान में रखकर लिखा गया था। इन रचनाओं को पूर्वी संवेदना और पश्चिमी अभिव्यक्ति की तकनीकों को जोड़ने की कोशिश के रूप में सराहा गया। इससे पता चलता है कि उनका संगीत किसी एक शैली तक सीमित नहीं था। वे 1996 में देश लौटे।
इस ख़बर का अर्थ
‘नीली साइकिल’ के पीछे सिर्फ़ किसी बड़ी रचना की भव्य परिकल्पना नहीं थी; रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सूझने वाले संगीत के छोटे-छोटे बीज दर्ज करने की आदत भी थी। शिन डोंग-इल ने बताया कि चलते हुए या खाना खाते हुए मन में आने वाले स्वरों को वे अपनी नोटबुक में लिख लेते हैं। लेख में ‘मोटिफ़’ से आशय संगीत की उस छोटी शुरुआत से है, जो आगे चलकर रचना के विषय या संरचना के रूप में विकसित हो सकती है। कॉलेज के दिनों में आसान धुनों से संगीत-डायरी लिखने की उनकी कोशिश को भी ऐसे छोटे विचारों को लगातार रचनाओं में बदलने का एक तरीका माना जा सकता है।
जिस संगीतकार को उन्होंने अपने संगीत पर सबसे बड़ा प्रभाव डालने वाला बताया, वह हंगरी में जन्मे संगीतकार बेला बार्तोक थे। शिन डोंग-इल ने कहा कि वे बार्तोक के उस दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं जिसमें तय ताल के ढाँचे के बजाय लोगों के वास्तविक गीतों और साँसों को महत्व दिया जाता था। इससे पता चलता है कि उनके संगीत-जगत को समझने का एक पहलू यह है कि वे पारंपरिक ढाँचे का जस का तस अनुसरण करने के बजाय, वास्तव में सुनाई देने वाली और महसूस की जाने वाली लय तथा संवेदना पर ध्यान देते हैं। यह लेख में दिए गए साक्षात्कार और रचनाओं के विवरण पर आधारित व्याख्या है; इसका मतलब यह नहीं कि शिन डोंग-इल की सभी रचनाओं को एक ही सिद्धांत से समझाया जा सकता है।
‘नीली साइकिल’ में पियानोवादक हान जोंग-ही द्वारा बजाए गए पियानो के 10 छोटे टुकड़े हैं। यह एल्बम नानजांग म्यूज़िक (난장뮤직) ने 1997 में जारी किया था। शिन डोंग-इल ने कहा कि इस एल्बम ने उन्हें इस धरती पर संगीतकार के रूप में जीवन बिताने का अवसर दिया। इस रचना का महत्व सिर्फ़ एक एल्बम जारी करने तक सीमित नहीं है; स्वयं संगीतकार के लिए यह रचनात्मक काम जारी रखने वाले जीवन का शुरुआती बिंदु बन गई।
मसलन, जिन पाठकों को यह एल्बम सुनने का अवसर मिले, वे देख सकते हैं कि शीर्षक वाले दस गीतों में से कौन-सा गीत उन्हें अपने दिन या किसी याद की ओर ले जाता है। इसका अर्थ यह मान लेना नहीं है कि हर गीत में कोई वास्तविक निजी घटना छिपी है। बल्कि यह अपने अनुभव से जानने का एक तरीका है कि संगीत के ज़रिए डायरी लिखने का विचार संगीतकार के काम में किस तरह सामने आता है।
लेख में लिखा है कि शिन डोंग-इल के पियानो संगीत और र्यू जे-सु के चित्रों वाली पुस्तक ‘पीली छतरी’ को 2002 में ‘न्यूयॉर्क टाइम्स की वर्ष की सर्वश्रेष्ठ चित्र-पुस्तक’ के रूप में चुना गया था। पुस्तक के बारे में बताया गया है कि उसमें बिना शब्दों के चित्रों के भीतर संगीत बहता है। इससे पता चलता है कि उनका काम सिर्फ़ पियानो एल्बम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चित्र और संगीत का एक साथ अनुभव कराने वाले रूप तक भी फैला।
पुष्ट तथ्य और जो बातें अभी अज्ञात हैं
पुष्ट तथ्य
- शिन डोंग-इल का जन्म 1965 में सियोल में हुआ था। तीसरी कक्षा में उन्होंने सोचा कि वे भी संगीत बनाएँगे।
- उन्होंने 1984 में सियोल राष्ट्रीय विश्वविद्यालय (서울대학교) के संगीत-रचना विभाग में दाखिला लिया और 1989 में अमेरिका जाकर न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय (뉴욕대학교) के स्नातकोत्तर कार्यक्रम में पढ़ाई की।
- ‘स्ट्रिंग्स’ की प्रतियोगिता में वायलिन और सेलो के लिए उनकी युगल रचना चुनी गई और उन्हें प्रकाशन के लिए 150 डॉलर मिले।
- 1996 में देश लौटने के बाद उन्होंने 1997 में पियानो के 10 छोटे टुकड़ों वाला एल्बम ‘नीली साइकिल’ जारी किया।
- लेख में बताया गया है कि शिन डोंग-इल ने बेला बार्तोक को अपने संगीत पर सबसे बड़ा प्रभाव डालने वाला संगीतकार बताया और ‘पीली छतरी’ को 2002 में ‘न्यूयॉर्क टाइम्स की वर्ष की सर्वश्रेष्ठ चित्र-पुस्तक’ के रूप में चुना गया था।
जो बातें अभी अज्ञात हैं
- शिन डोंग-इल ने ‘नीली साइकिल’ के अलग-अलग गीत ठीक कब लिखे और हर गीत की रचना के पीछे क्या वजह थी, यह लेख में नहीं बताया गया है।
- यह भी पता नहीं चलता कि ‘पीली छतरी’ को चित्र-पुस्तक के उस चयन की किस श्रेणी में रखा गया था और चयन की प्रक्रिया क्या थी।
पाठक किन बातों की जाँच करें
- ‘नीली साइकिल’ सुनने का अवसर मिले तो दसों गीतों के शीर्षकों और अपने वास्तविक अनुभव के बीच के संबंध पर ध्यान दें, लेकिन लेख में दिए तथ्यों की तरह गीतों की रचना की पृष्ठभूमि का अनुमान न लगाएँ।
- ‘पीली छतरी’ के चयन का अर्थ और जानना हो तो लेख में दिए गए चयन के नाम और उसकी श्रेणी तथा प्रक्रिया को अलग-अलग जाँचना ज़रूरी है। इस लेख से श्रेणी और प्रक्रिया का पता नहीं चलता।




















