2020 की अमेरिकी फ़िल्म 《द ओल्ड गार्ड》 अमर योद्धाओं के एक गुप्त दल की कहानी है, जो मानव सभ्यता के संकट में पड़ने पर बार-बार सामने आकर लोगों और सभ्यता की रक्षा करता है। किम सॉन्गोन फ़िल्म के पात्रों और उनके रिश्तों को युद्ध, नस्ल और जातीयता, लिंग, धर्म तथा पूर्व-पश्चिम के संघर्षों का प्रतिबिंब दिखाने वाले प्रतीकों के रूप में पढ़ते हैं। उनका तर्क है कि सभ्यता की रक्षा के लिए टकराव से आगे बढ़कर सह-अस्तित्व और सुलह को चुनना चाहिए।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
फ़िल्म के चार अमर योद्धा इतिहास की हर आपदा के दौरान सामने आकर लोगों की जान और सभ्यता की रक्षा करते आए हैं। स्तंभ के अनुसार, उनके द्वारा बचाए गए लोगों के वंशज भी बाद के संकटों में दुनिया को बचाने में योगदान देते हैं—जैसे महामारी का इलाज विकसित करना या कुशल कूटनीति से युद्ध रोकना। इस तरह, अमर योद्धाओं की भूमिका केवल एक बार बचाव करने तक सीमित नहीं है; वे आने वाली पीढ़ियों के लिए सभ्यता की रक्षा कर पाने की संभावना भी बनाए रखते हैं।
दल की नेता एंडी, स्किथिया की एंड्रोमाके है। स्तंभ के अनुसार, उसकी उम्र कम-से-कम 6,000 वर्ष है। स्किथिया काला सागर के उत्तर में स्थित एक प्राचीन क्षेत्र था, जिसके बारे में बताया गया है कि वह आज के यूक्रेन और दक्षिणी रूस से लेकर एशिया की अल्ताई पर्वतमाला तक फैला हुआ था। इस पृष्ठभूमि के आधार पर किम सॉन्गोन एंडी को पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया का प्रतिनिधित्व करने वाले पात्र के रूप में समझते हैं।
एंडी का साथी बूकर पेरिस में रहता है और स्तंभ के अनुसार, वह पश्चिमी यूरोप का प्रतीक हो सकता है। जो और निकी धर्मयुद्धों के दौरान एक-दूसरे के दुश्मन के रूप में मिले थे, लेकिन उन्हें प्रेम हो गया। स्तंभ दोनों को इस उम्मीद के प्रतीक के रूप में देखता है कि ईसाई धर्म और इस्लाम के बीच का टकराव सुलह में बदल सकता है। फ़िल्म में बाद में दल में शामिल होने वाली अफ्रीकी-अमेरिकी महिला मरीन नाइल भी है। किम सॉन्गोन उसकी व्याख्या उस अश्वेत महिला के प्रतीक के रूप में करते हैं, जिसे नस्लीय पूर्वाग्रह और पुरुषों के पूर्वाग्रह—दोनों का सामना करना पड़ता है।
एक और अमर योद्धा क्विन को एंडी के साथ जादू-टोने के आरोप में पकड़ लिया जाता है। स्तंभ के अनुसार, एंडी मौत से बच निकलती है, लेकिन क्विन को लोहे की बनी ‘आयरन मेडेन’ नामक यातना-यंत्र में बंद करके समुद्र में फेंक दिया जाता है। अमर होने के कारण क्विन लगभग 500 साल तक डूबकर मरने और फिर जीवित होने का सिलसिला दोहराती है। एंडी द्वारा क्विन को बचा न पाने से उपजा अपराधबोध और गलतफ़हमी के बाद दोनों का सुलह करना—स्तंभ में इन दृश्यों को पूर्व-पश्चिम संबंधों के निकट और साथ ही अस्थिर पहलुओं को उजागर करने वाले प्रसंगों के रूप में समझा गया है।
फ़िल्म की कहानी पेरिस, लंदन और रोम के साथ-साथ सियोल, जकार्ता, दक्षिण सूडान और अफ़ग़ानिस्तान जैसे कई स्थानों तक फैली है। सियोल में एंडी अपने पुराने मित्र तुआ से मिलने जाती है, जिसे अमर योद्धाओं के बारे में गहरी जानकारी है, और उस संकट से निपटने में मदद लेती है जिसका वह सामना कर रही है। इस तरह, अलग-अलग क्षेत्रों और पात्रों की कहानियों को एक ही दल में समेटने की फ़िल्म की कल्पना, स्तंभ के सह-अस्तित्व के विषय—संस्कृतियों और धर्मों के साथ रहने—से जुड़ती है।
इस ख़बर का अर्थ
इस स्तंभ का मुख्य ज़ोर अमर योद्धाओं की काल्पनिक अवधारणा पर नहीं, बल्कि उन संघर्षों पर है जिनका वे प्रतीक हैं। किम सॉन्गोन युद्ध, नस्लीय, जातीय, लैंगिक और धार्मिक टकरावों तथा पूर्व और पश्चिम के बीच संघर्ष को मानव सभ्यता के लिए ख़तरा मानते हैं। ख़ास तौर पर, कहानी में पहले एक-दूसरे के दुश्मन रहे जो और निकी का प्रेम में पड़ना और एंडी तथा क्विन का ग़लतफ़हमियाँ दूर करके सुलह करना इस संभावना को दिखाता है कि शत्रुता हमेशा बनी रहने वाली स्थिति नहीं होती।
हालांकि, यह फ़िल्म की किम सॉन्गोन द्वारा की गई व्याख्या है। मूल लेख से यह पुष्टि नहीं होती कि फ़िल्म के निर्माताओं ने लेख में बताए गए प्रतीकों को सचमुच इसी उद्देश्य से रखा था।
स्तंभ यह भी बताता है कि अमर योद्धाओं की उपचार करने की क्षमता की कोई स्थायी गारंटी नहीं है। यह क्षमता किसी दिन अचानक समाप्त हो सकती है; ऐसा होने पर अमर योद्धा नश्वर बन जाएंगे और मानव सभ्यता की रक्षा नहीं कर पाएंगे। किम सॉन्गोन इस कल्पना को इस विचार से जोड़ते हैं कि मनुष्यों को केवल किसी और की सुरक्षा पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इस व्याख्या के अनुसार, सभ्यता की रक्षा का काम केवल विशेष क्षमताओं वाले लोगों पर छोड़ देने के बजाय, संघर्षों से निपटने वाले लोगों के चुनावों से भी जुड़ा है।
यहां स्तंभ जिस दिशा का सुझाव देता है, वह है ‘द्वैतवादी चुनाव की सोच’ (यह दृष्टिकोण कि दो में से केवल एक को चुनना होगा) को छोड़कर ‘दोनों’ की संभावना को स्वीकार करना। ईसाई धर्म या इस्लाम, पूंजीवाद या समाजवाद, पूर्व या पश्चिम में से किसी एक को चुनने के बजाय, अलग-अलग व्यवस्थाओं और सभ्यताओं के सह-अस्तित्व और सुलह के रास्ते तलाशने का तर्क दिया गया है। उदाहरण के लिए, अगर किसी संघर्ष को देखकर पाठक को लगे कि एक पक्ष का समर्थन करना ही एकमात्र विकल्प है, तो यह स्तंभ सुझाव देता है कि विरोधी पक्षों के साथ मिलकर रहने की शर्तों पर भी विचार किया जाए। इस पर ध्यान देना इसलिए ज़रूरी है कि यह कोई ठोस समाधान पेश करने के बजाय संघर्षों को देखने का नज़रिया बदलने का तर्क देता है।
पुष्ट तथ्य और जिन बातों का अभी पता नहीं
पुष्ट तथ्य
- स्तंभ 《द ओल्ड गार्ड》 को एक ऐसी फ़िल्म के रूप में पेश करता है, जिसमें अमर योद्धाओं का गुप्त दल हर संकट के दौरान मानव सभ्यता को बचाता आया है।
- एंडी स्किथिया की एंड्रोमाके है और स्तंभ बताता है कि उसकी उम्र कम-से-कम 6,000 वर्ष है।
- जो और निकी धर्मयुद्धों के दौरान दुश्मन के रूप में मिलने के बाद प्रेम में पड़ते हैं, जबकि क्विन समुद्र में लगभग 500 साल तक डूबकर मरने और फिर जीवित होने का सिलसिला दोहराती है।
- किम सॉन्गोन फ़िल्म के पात्रों और घटनाओं को कई सामाजिक और सांस्कृतिक संघर्षों के प्रतीक के रूप में समझते हैं और सह-अस्तित्व तथा सुलह की पैरवी करते हैं।
- किम सॉन्गोन का परिचय सियोल राष्ट्रीय विश्वविद्यालय (서울대학교) के अंग्रेज़ी भाषा एवं साहित्य विभाग के एमेरिटस प्रोफ़ेसर और डार्टमथ कॉलेज के विज़िटिंग स्कॉलर के रूप में दिया गया है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्तंभ में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं।
जिन बातों का अभी पता नहीं
- इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि फ़िल्म के निर्माताओं ने स्तंभ में पात्रों के लिए बताए गए प्रतीकों और संघर्षों की व्याख्या का इरादा रखा था या नहीं।
- स्तंभ सह-अस्तित्व और सुलह की आवश्यकता पर ज़ोर देता है, लेकिन वास्तविक दुनिया के अलग-अलग संघर्षों को हल करने की ठोस प्रक्रिया या नीति पेश नहीं करता।
पाठक किन बातों की जांच करें
- फ़िल्म की कहानी और स्तंभ की प्रतीकात्मक व्याख्या को अलग-अलग समझकर पढ़ना चाहिए। पात्रों की पृष्ठभूमि फ़िल्म की कहानी का हिस्सा है, जबकि किसी पात्र को किसी खास क्षेत्र या समूह का प्रतिनिधि बताने वाली व्याख्या किम सॉन्गोन की है।
- इस पर अलग से विचार किया जा सकता है कि क्या स्तंभ का निष्कर्ष हर तरह के संघर्ष पर लागू होने वाला समाधान है, या यह केवल ऐसा नज़रिया सुझाता है जो टकराव से आगे बढ़कर सह-अस्तित्व की कल्पना करने के लिए प्रेरित करता है।
- लेखक के विचारों और फ़िल्म निर्माताओं के इरादे को एक मानकर नहीं चलना चाहिए। मूल लेख इस सवाल का जवाब नहीं देता कि निर्माताओं ने इन प्रतीकों को जानबूझकर रखा था या नहीं।




















