सहस्र-वर्षीय वन विद्यालय (천년숲학교) के प्रमुख किम जे-उंग ने हाल ही में ‘पेड़ों के सहारे चोई चिवॉन के पुंगन्यु-पथ को पढ़ना’ (나무로 읽는 최치원 풍류길) प्रकाशित किया। इस किताब में उन्होंने विद्यालय के सदस्यों के साथ चोई चिवॉन से जुड़े 63 ऐतिहासिक स्थलों और साहित्य-सृजन के स्थानों का दौरा किया और ‘ग्येवोन पिल्ग्योंग’ (계원필경) में आए पेड़ों और उनके प्रतीकों पर चर्चा की है। किम बताते हैं कि चोई चिवॉन ने हमयांग में पानी का रास्ता मोड़ा, तटबंध बनाया और फिर पेड़ लगाकर सांगनिम वन तैयार किया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
लेख के अनुसार, सहस्र-वर्षीय वन विद्यालय वह विद्यालय है जिसे किम ने मार्च 2023 में ग्योंगजू में खोला था और इसके 40 सदस्य हैं। यह किताब विद्यालय की पाठ्यपुस्तक के रूप में इस्तेमाल करने के उद्देश्य से तैयार की गई। इसके लिए सदस्यों ने उन 63 ऐतिहासिक स्थलों और साहित्य-सृजन के स्थानों का दौरा किया जहाँ चोई चिवॉन की छाप मौजूद है। यह दौरा केवल दक्षिण कोरिया तक सीमित नहीं रहा। किम ने बताया कि पिछले साल नवंबर में वे सदस्यों के साथ चीन के जिआंगसू प्रांत के यांगझोउ स्थित चोई चिवॉन स्मारक संग्रहालय और नानजिंग के गाओचुन ज़िले में स्थित स्सांगन्योबुन भी गए थे।
किम चोई चिवॉन के साहित्य को पारिस्थितिक संस्कृति के नज़रिये से देखते हैं और इसमें ‘ग्येवोन पिल्ग्योंग’ अहम सुराग है। उन्होंने बताया कि इस संकलन में पेड़ों की 34 प्रजातियों के 135 पेड़ आते हैं। लेख में जिन प्रमुख पेड़ों का उल्लेख है, उनमें शहतूत के 27, दालचीनी के 18, बाँस के 14 और चीड़ तथा विलो के 10-10 पेड़ शामिल हैं। इसके बाद कांटेदार ओक के 6, चाय के पेड़ और बेर के पेड़ के 5-5, तथा आड़ू और जुनिपर के 4-4 पेड़ बताए गए हैं।
पेड़ों को केवल पृष्ठभूमि या पौधों की सूची के रूप में नहीं, बल्कि साहित्यिक अर्थ व्यक्त करने वाले विषय के रूप में पढ़ा गया है। किम की व्याख्या है कि दालचीनी का पेड़ चोई चिवॉन का सबसे प्रिय पेड़ था और वह शाही परीक्षा में सफल होने की आकांक्षा तथा निष्ठा और दृढ़ता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि चीड़ और बाँस भी दुनिया के बदलावों के बीच अपने सिद्धांतों और दृढ़ता पर कायम रहने के प्रतीक के रूप में आते हैं। हालांकि, यह किताब के लेखक किम की साहित्यिक व्याख्या है; इसे लेख में बताए गए पेड़ों की संख्या गिनने के आधार से अलग करके देखना चाहिए।
इस खबर का अर्थ
यह किताब जिस तरीके से पढ़ने का सुझाव देती है, वह क्लासिक्स को आज की पर्यावरणीय समस्याओं के सीधे जवाब देने वाले स्रोत के रूप में देखने के बजाय, इस बात की पड़ताल करना है कि पुराने समय के लोगों ने प्रकृति को किन प्रतीकों और कल्पनाओं के ज़रिये व्यक्त किया। पेड़ों की प्रजातियों और रचनाओं में उनके उल्लेख के ढंग पर ध्यान देने से साहित्यिक कृतियों के साथ-साथ उनसे जुड़े स्थानों और क्षेत्रीय वनों को भी समझा जा सकता है। क्लासिक्स के अध्ययन को साहित्य, इतिहास और दर्शन तक सीमित न रखकर पारिस्थितिक संस्कृति के नज़रिये तक विस्तार देना इस किताब को उल्लेखनीय बनाता है।
किम ने हमयांग के सांगनिम वन के निर्माण को चोई चिवॉन की पारिस्थितिक उपलब्धियों में गिनाया। उनके मुताबिक, बाढ़ रोकने के लिए चोई चिवॉन ने पानी का रास्ता मोड़ा और तटबंध बनाया, फिर पेड़ लगाए। यह कहानी जंगल को महज़ सुंदर दृश्य नहीं, बल्कि जलमार्गों, आपदा से निपटने और स्थानीय समुदाय के जीवन से जुड़ी जगह के रूप में देखने की प्रेरणा देती है। हालांकि, सांगनिम वन के निर्माण की विशिष्ट प्रक्रिया और उसमें चोई चिवॉन की भूमिका के बारे में लेख में किम की ओर से दी गई जानकारी ही है; इतिहास के रूप में इसकी पुष्टि के लिए संबंधित स्रोतों की भी जाँच करनी होगी।
उदाहरण के लिए, अगर कोई पाठक सांगनिम वन जाता है, तो वह सामने दिख रहे जंगल का आनंद लेने पर ही न रुके, बल्कि यह भी देखे कि वहाँ जलमार्गों और तटबंधों के बारे में क्या जानकारी दी गई है और वह जानकारी किन स्रोतों पर आधारित है। इस तरह साहित्य में पेड़ों के प्रतीकों और वास्तविक वन के इतिहास को साथ-साथ देखते हुए व्याख्या और पुष्ट तथ्यों में अंतर किया जा सकता है।
किम ने 2023 में चोई चिवॉन साहित्य संग्रहालय (최치원문학관) में आयोजित ‘चोई चिवॉन और बौद्ध धर्म’ (최치원과 불교) अकादमिक सम्मेलन में एक शोधपत्र प्रस्तुत किया था, जिसमें उन्होंने चोई चिवॉन के साहित्य को पारिस्थितिक-सांस्कृतिक कल्पनाशीलता के नज़रिये से देखा। उन्होंने बताया कि पिछले साल मार्च में लगी आग के बाद चोई चिवॉन साहित्य संग्रहालय की केवल ढाँचागत संरचना बची थी और गोउन्सा मंदिर (고운사) के कई भवनों तथा मंदिर के वन को भी नुकसान पहुँचा था। किम ने यह इच्छा भी जताई कि गोउन्सा मंदिर के आसपास ‘ग्येवोन पिल्ग्योंग’ में आए पेड़ लगाकर एक ऐसा सैर-पथ बनाया जाए, जिससे चोई चिवॉन को पारिस्थितिक संस्कृति के रूप में समझा जा सके।
पुष्ट तथ्य और वे बातें जिनकी अभी पुष्टि नहीं हो सकी
पुष्ट तथ्य
- प्रमुख किम जे-उंग ने हाल ही में ‘पेड़ों के सहारे चोई चिवॉन के पुंगन्यु-पथ को पढ़ना’ प्रकाशित किया।
- सहस्र-वर्षीय वन विद्यालय मार्च 2023 में ग्योंगजू में खुला था और लेख के अनुसार इसके 40 सदस्य हैं।
- किम ने बताया कि उन्होंने सदस्यों के साथ चोई चिवॉन से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों और साहित्य-सृजन के 63 स्थानों का दौरा किया।
- किम ने बताया कि ‘ग्येवोन पिल्ग्योंग’ में पेड़ों की 34 प्रजातियों के 135 पेड़ आते हैं और पेड़ों के प्रतीकात्मक अर्थ भी बताए।
- किम ने सांगनिम वन के निर्माण और चोई चिवॉन साहित्य संग्रहालय तथा गोउन्सा मंदिर को हुए नुकसान के बारे में जानकारी दी।
वे बातें जिनकी अभी पुष्टि नहीं हो सकी
- लेख में यह नहीं बताया गया है कि ‘ग्येवोन पिल्ग्योंग’ में पेड़ों की प्रजातियों और संख्या की गणना किस संस्करण और किस मानदंड के आधार पर की गई।
- केवल इस लेख से यह पुष्टि नहीं की जा सकती कि सांगनिम वन के निर्माण और चोई चिवॉन से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों की व्याख्या के समर्थन में कौन-से ऐतिहासिक स्रोत मौजूद हैं।
- आग से क्षतिग्रस्त चोई चिवॉन साहित्य संग्रहालय और गोउन्सा मंदिर के पुनर्निर्माण की स्थिति पर इस लेख में चर्चा नहीं की गई है।
पाठक किन बातों की जाँच करें
- ‘ग्येवोन पिल्ग्योंग’ में पेड़ों की संख्या का उल्लेख करते समय देखें कि किताब में गणना का मानदंड और इस्तेमाल किया गया संस्करण भी दिया गया है या नहीं।
- सांगनिम वन या चोई चिवॉन से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों पर जाते समय देखें कि वहाँ दी गई ऐतिहासिक व्याख्या किन स्रोतों पर आधारित है।
- पेड़ों के साहित्यिक प्रतीकों को पढ़ते समय रचना में प्रयुक्त अभिव्यक्तियों, किम की व्याख्या और पुष्ट ऐतिहासिक तथ्यों को अलग-अलग समझें।




















