रिचर्ड डॉकिन्स की 《द गॉड डिल्यूज़न》(The God Delusion) के प्रकाशन के 20 साल इस साल पूरे हुए। यह पुस्तक धर्म—खासकर ईसाई धर्म—की लगातार आलोचना करती है। इसके 10 अध्यायों में से चौथा अध्याय, ‘ईश्वर का लगभग निश्चित रूप से अस्तित्व क्यों नहीं है’, इसकी मुख्य दलील पेश करता है। इस पुस्तक की 30 लाख से अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं और इसका 30 से अधिक भाषाओं में अनुवाद हुआ है, लेकिन इसके प्रभाव जितना ही बड़ा विवाद भी रहा।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

डॉकिन्स विकासवादी जीवविज्ञानी हैं और 《द सेल्फ़िश जीन》(1976) से मशहूर हुए। क्रिस्टोफ़र हिचेन्स, डैनियल डेनेट और सैम हैरिस के साथ उन्हें ‘नए नास्तिकतावाद के चार घुड़सवार’ कहा गया। इस पुस्तक को मिली चर्चा की पृष्ठभूमि में धर्म और राजनीतिक सत्ता के संबंध को लेकर चिंता भी थी। मूल लेख में 1999 में अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों की बहस का ज़िक्र है। उसमें जॉर्ज डब्ल्यू. बुश से पूछा गया कि वे किस राजनीतिक दार्शनिक या विचारक से सबसे अधिक अपनी पहचान जोड़ते हैं, तो उन्होंने ‘मसीह’ जवाब दिया।

पुस्तक की मुख्य बहस बुद्धिमत्तापूर्ण अभिकल्प (यह दावा कि प्रकृति की जटिलता किसी बुद्धिमान अभिकल्पक की मंशा से पैदा हुई) को लेकर है। डॉकिन्स कहते हैं कि जीवों की जटिलता की व्याख्या के लिए किसी अभिकल्पक को सामने रख देने से समस्या हल नहीं होती। उनका तर्क है कि अगर अभिकल्पक की व्याख्या करनी है, तो यह भी पूछना होगा कि उससे अधिक बुद्धिमान किसी सत्ता ने अभिकल्पक को बनाया या नहीं।

इसके जवाब में पुस्तक बताती है कि प्राकृतिक चयन (वह प्रक्रिया जिसमें पर्यावरण के अनुकूल आनुवंशिक भिन्नताएँ अगली पीढ़ियों तक पहुँचती हैं) के ज़रिये जटिलता कैसे पैदा हो सकती है। डॉकिन्स की व्याख्या में जीव सरल शुरुआती अवस्था से क्रमिक रूप से विकसित हुए और जटिलता केवल संयोग से पैदा नहीं होती। यादृच्छिक आनुवंशिक भिन्नताओं में से वे भिन्नताएँ प्राकृतिक चयन के ज़रिये बनी रहती हैं जो किसी खास पर्यावरण में जीवित रहने और प्रजनन करने का लाभ देती हैं।

इस खबर का अर्थ

《द गॉड डिल्यूज़न》 पर मुख्य रूप से तीन तरह की आपत्तियाँ उठाई गईं। आलोचकों ने कहा कि यह धार्मिक आस्था को वास्तविकता से अधिक सरल और हास्यास्पद रूप में दिखाती है; डॉकिन्स का लहजा बहुत तीखा और आक्रामक है; और यह विज्ञान को धर्म की जगह पर रखती है। साहित्य के विद्वान टेरी ईगलटन ने आलोचना की कि डॉकिन्स और अन्य लोगों ने धार्मिक आस्था का ऐसा ‘भद्दा मज़ाक’ बनाया, जिससे ‘धर्मशास्त्र के प्रथम वर्ष का विद्यार्थी भी चौंक जाए’। धर्मशास्त्री एलिस्टर मैक्ग्रा ने उनकी बयानबाज़ी को ‘तीखी और आक्रामक’ बताया।

इन आपत्तियों के बावजूद डॉकिन्स को सार्वजनिक बहस से किसी अहम अर्थ में बाहर नहीं रखा गया था। मूल लेख बताता है कि इस पुस्तक का विरोध मुख्यतः बौद्धिक बहस के रूप में सामने आया। इससे पता चलता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चर्चा में न केवल आलोचना करने के अधिकार पर, बल्कि आलोचना का जवाब देने के अवसर और बहस के मंच को बनाए रखने के सवाल पर भी विचार करना ज़रूरी है।

डॉकिन्स ने अनुमान लगाया कि धर्म, विकास के दौरान उभरी दूसरी प्रवृत्तियों का उप-उत्पाद हो सकता है। उनके मुताबिक, चीज़ों को सहज रूप से कोई उद्देश्य देने की प्रवृत्ति या बच्चे को ख़तरों से बचने के लिए बड़ों की बात मानने की क्षमता का धर्म की जड़ों से संबंध हो सकता है। इसे धर्म की उत्पत्ति से जुड़ा स्थापित तथ्य नहीं, बल्कि डॉकिन्स की परिकल्पना मानकर पढ़ना चाहिए।

उन्होंने लिखा कि धर्म की चार भूमिकाएँ हैं: व्याख्या, परामर्श, सांत्वना और प्रेरणा। साथ ही, उन्होंने तर्क दिया कि धर्म से लोगों को सांत्वना मिलती है, केवल इस तथ्य से धार्मिक आस्था की सच्चाई साबित नहीं होती। उदाहरण के लिए, अगर कोई पाठक सिर्फ़ इस आधार पर कि उसकी आस्था उसे सांत्वना देती है, यह भी तय करे कि वह आस्था सच है या नहीं, तो डॉकिन्स का भेद सांत्वना के काम और सच्चाई के सवाल की अलग-अलग पड़ताल करने को कहता है। मुद्दा सांत्वना के मूल्य को नकारना नहीं, बल्कि भावनात्मक लाभ और प्रमाणों पर आधारित निर्णय को एक ही चीज़ न मानना है।

पुष्ट तथ्य और वे बातें जो अभी अज्ञात हैं

पुष्ट तथ्य

  • 《द गॉड डिल्यूज़न》 धर्म—खासकर ईसाई धर्म—की आलोचना करती है; इसके 10 अध्यायों में से चौथे को मुख्य दलील के रूप में पेश किया गया है।
  • पुस्तक की 30 लाख से अधिक प्रतियाँ बिकीं और इसका 30 से अधिक भाषाओं में अनुवाद हुआ।
  • मुख्य आपत्तियाँ थीं कि यह धार्मिक आस्था का उपहास करती है, इसका लहजा आक्रामक है और यह विज्ञान को नए धर्म की तरह पेश करती है।
  • डॉकिन्स ने धर्म की चार भूमिकाएँ बताईं और तर्क दिया कि सांत्वना मिलना किसी बात की सच्चाई साबित नहीं करता।
  • मूल लेख के अनुसार, आज डॉकिन्स धर्म की आलोचना से अधिक ट्रांसजेंडर पहचान से जुड़ी टिप्पणियों के कारण विवादों में रहते हैं।

वे बातें जो अभी अज्ञात हैं

  • 《द गॉड डिल्यूज़न》 के पहले संस्करण के प्रकाशन की सटीक तारीख नहीं दी गई है।
  • मूल लेख यह भी नहीं बताता कि 30 लाख से अधिक की बिक्री का आँकड़ा किस तारीख तक का है।

पाठकों के लिए जाँचने योग्य बातें

  • पुस्तक की दलीलें पढ़ते समय धर्म के मूल्यांकन, प्राकृतिक चयन की व्याख्या और धर्म की उत्पत्ति के बारे में लगाए गए अनुमान को अलग-अलग देखा जा सकता है।
  • धार्मिक आस्था से मिलने वाली सांत्वना या उसके सामाजिक कामकाज पर चर्चा करते समय यह देखा जा सकता है कि उस कामकाज की व्याख्या और आस्था की सच्चाई के समर्थन में दिए गए प्रमाण क्या एक ही सवाल हैं।
  • धर्म की आलोचना से सहमत होना या न होना अलग बात है; आलोचना में दिए गए तर्कों और उस पर उठाई गई आपत्तियों, दोनों को देखने से इस बहस के मुद्दे अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।